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मित्तल हॉस्पिटल में रोटा व ओसीटी तकनीक के एक साथ उपयोग से हृदय रोगी का किया उपचार

मित्तल हॉस्पिटल में रोटा व ओसीटी तकनीक के एक साथ उपयोग से हृदय रोगी का किया उपचार

सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ विवेक माथुर ने की सर्जरी

अजमेर (अजमेर मुस्कान)। अजमेर के एक वयोवृद्ध हृदय रोगी का रोटा एबलेशन व ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी (ओसीटी) तकनीक का एक साथ उपयोग कर सफल उपचार किया गया। मित्तल हॉस्पिटल के सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ विवेक माथुर ने अजमेर में पहली बार इस एडवांस तकनीक से एंजियोप्लास्टी की। सामान्य तौर पर इस तरह की एडवांस सर्जरी देश विदेश के बड़े चिकित्सा संस्थानों में की जाती है। अजमेर के मित्तल हॉस्पिटल में रोटा व ओसीटी तकनीक का एक ही रोगी पर एक ही समय में उपयोग कर उपचार किया जाना सराहनीय उपलब्धि माना जा रहा है।

यह तकनीक हृदय रोगियों के हृदय की रक्त धमनियों में जमा सख्त कैल्शियम को हटा कर सटीक जगह पर स्टेंट्स लगाकर हृदय तक रक्त का प्रवाह सुचारू बनाने के काम आती है। अधिक उम्र के गंभीर हार्ट अटैक से पीड़ित हृदय रोगियों के लिए जिनके नसों में अधिक एवं कठोर कैल्शियम जमा होने और लंबे ब्लॉकेज होने की वजह से एंजियोप्लास्टी नहीं हो पाती है, उन मरीजों में रोटा एबलेशन तकनीक के साथ ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी (ओसीटी) तकनीक का उपयोग बेहतर व कारगर रहता है। रोटा एबलेटर तकनीक धमनियों में जमा कैल्शियम को हटा कर स्टेंट स्थापित करने का मार्ग तैयार करती है। वहीं ओसीटी जो एक इमेजिंग तकनीक है धमनी के अंदर की विस्तृत 3डी छवियों दर्शाती है इससे रोगी के ब्लॉकेज का सटीक आकलन हो जाता है और जिससे हृदय रोगी के सटीक जगह स्टेंट लगाने में मदद मिल जाती है।

उम्र दराज हृदय रोगी को धमनियों में सख्त ब्लॉकेज की अवस्था में बाईपास सर्जरी कराए जाने के बीच एक विकल्प मिल जाता है।

मित्तल हॉस्पिटल के सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ विवेक माथुर के अनुसार करीब 75 वर्षीय वृद्ध जब उपचार के लिए हॉस्पिटल पहुंचे तो जांच में पाया गया कि उनके हृदय की रक्त कोशिकाओं में कठोर कैल्शियम जमा था साथ ही ब्लॉकेज लंबे थे। रोगी को गंभीर हार्ट अटैक आया था। उन्होंने बताया कि रोगी की धमनियों में ब्लॉकेज का सटीक आकलन करने के लिए ओसीटी जो एक इमेजिंग तकनीक है का उपयोग करते हुए रोट एबलेटर तकनीक से एंजियोप्लास्टी किए जाने की सलाह दी गई। जिसे रोगी ओर उनके परिवारजन ने स्वीकार किया।

इस तकनीक से धमनी के अंदर की विस्तृत 3डी छवियों से रोगी के ब्लॉकेज का सटीक आकलन हो गया। जिससे हृदय रोगी के स्टेंट लगाने मदद मिली। उपचार के बाद रोगी को तीसरे दिन हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई।

निदेशक डॉ दिलीप मित्तल ने बताया कि रोटा एबलेटर के साथ ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी (ओसीटी) तकनीक के जरिए हृदय रोगियों को अजमेर में उपचार उपलब्ध हो रहा है, यह हृदय रोगियों के लिए राहत की बात है। बहुत से हृदय रोगी अजमेर से बाहर जाकर उपचार पाने की अवस्था में नहीं होने के कारण रोग को नजरअंदाज करने लगते हैं। अब उन्हें अधिक उम्र व रोग की गंभीर अवस्था में भी उपचार का विकल्प स्थानीय स्तर पर मिल सकेगा।

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