दुलारी बाई को मिला वरदान ही बन गया अभिशाप
ईश्वर ने जीतना दिया उतने में ही खुश रहने का संदेश दे गया नाटक
12 कलाकारों ने सशक्त अभिनय कीे अमिट छाप छोड़ी दर्शको ताली बजाने को किया मजबूर
अजमेर (अजमेर मुस्कान)। अजमेर थियेटर फेस्टिवल के अंतिम दिन सतगुरू इंटरनेशनल के सभागार में अपना थियेटर, आधुनिक नाट्यकला संस्थान, आप-हम संस्था, कलाअंकुर, इंडियन लेडिज क्लब, न्यू आदर्श शिक्षा समिति, द टर्निग पॉईट स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में सतगुरू इंटरनेशनल स्कूल के सहयोग से चार दिवसीय अजमेर थियेटर फेस्टिवल के चौथे दिन बीकानेर की संस्था अनुराग कला केन्द्र द्वारा मणि मधुकर लिखित व सुदेश व्यास द्वारा निर्देशित नाटक दुलारी बाई का सफलत मंचन किया गया। दुलारी बाई लोक रंगों और परिवेश से जुड़ी एक लोककथा है जिसके माध्यम से हास्य के साथ ईश्वर ने जीतना दिया उतने में ही खुश रहने का संदेश दिया गया एक कंजूस औरत दुलारी बाई को जब वरदान मिल जाता है वह जिस चीज को छूएगी बस सोना बन जाएगा इससे वह पहले तो खुश होती है लेकिन बाद में यही वरदान अभिशाप बन जाता है नाटक दुजारी भाई की कहानी एक कंजूस औरत की है जो चमड़ी जाए पर दमड़ी ना जाए पर ही विश्वास करती है उसके पास पैसा है लेकिन आज भी वह बाप दादाओं के जमाने से चली आ रही चप्पल ही पहनती है संवादों के साथ कहानी आगे बढ़ती है और दुलारी भाई ईश्वर से कहती है कि वह चीज जिस चीज को छुए हुए सोना बन जाए ईश्वर से दुलारी बाई को यह वरदान मिल जाता है लेकिन यह वरदान उसके लिए अभिशाप बन जाता है क्योंकि वह जो चीज होती है वह सोने की बन जाती है यहां तक की उसका पति सोने का हो जाता है जब वह खाने को छूती है तो खाना भी सोना बन जाता है दुलारी इतना परेशान हो जाती है कि ईश्वर को याद करती है माफी मांगते हुए अपना वरदान वापस लेने को कहती है। नाटक में गांव के पटेल जी गंगाराम जाट फर्जी लाल चिन्ना गडरिया जैसे चरित्र हंसी की स्थितियां उत्पन्न करते हैं,
नाटक में दुलारी भाई (प्रियंका आर्य), कल्लू भांड (के.के.रंगा), पटेल जी (सुनील जोशी), गंगाराम (सुरेन्द्र स्वामी) फर्जीलाल और कटोरीमल (अशोक व्यास), चिमना मांझी (मुकेश सेवग), ननकु (विकास शर्मा), ईश्वर (राहुल चावला), पंडित (सौरभ आचार्य) कोरस बंटी हर्ष का रहा। संगीत राजेन्द्र झुंझ व प्रेम सागर का रहा।
नाटक के प्रारंभ में समारोह से जुडे़ सहयोगियों का सम्मान किया गया, व नाटक के अंत में सभी कलाकारों का सम्मान व नाट्य निर्देशक को स्मृति व शॉल ओढाकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर राजा डी थारानी, सुनील दत्त जैन, कंवल प्रकाश किशनानी, डॉ. हरबस दुआ, गिरधर तेजवानी, एस.पी.मित्तल, सुरेन्द्र चतुर्वेदी, सोमरत्न आर्य, रमेश अग्रवाल, वरिष्ठ रंगकर्मी लाखन सिंह, यॉबी जॉर्ज, निरंजन कुमार, राजेन्द्र सिंह, स्निग्धा, उज्जवल मित्रा, विष्णु अवतार भार्गव, नरेन्द्र भारद्वाज, विकल्प सिंह, हरीश बेरी, दीलिप पारीक, होशिका, संदीप काव्यांश, अंकित, नितेश, अरविंद, रतन, अंशुल, शैलूष, मुकेश, सतीश कुमार, जुम्मा खान, तरूण, मोहित, शब्बीर, तरूण कुमार, गिरराज, गोपाल बंजारा, कृष्ण गोपाल पाराशर, मृदुल भारद्धाज, सुचिर भारद्धाज, प्रीति तोषनीवाल, रास बिहारी गौड़, अनंत भटनागर, पवित्र कोठारी, श्रीमती श्वेता आनंद, हमेन्त भाटी, अनिल जैन, प्रहलाद पारीक, प्रशान्त अग्रवाल, पुष्पा लोढ़ा, डॉ. लाल थदानी, नरेश अगवानी, मेघा, पद्मा, विमलेश, भामिनी, आदि समाजसेवी व प्रबुद्धजन उपस्थित थे।
संस्था के यॉबी जॉर्ज ने बताया अजमेर थियेटर फेस्टिवल में उपस्थित दर्शकों अभिवादन किया और समारोह की सफल बनाने के लिए सभी आभार व्यक्त किया।
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