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अजमेर में पहली बार चार दिवसीय नाट्य फेस्टिवल का भव्य शुभारंभ

अजमेर में पहली बार चार दिवसीय नाट्य फेस्टिवल का भव्य शुभारंभ

नाटक चूंडामति के मंचन ने समाज में व्याप्त पाखंड व ढोंग पर किया करारा प्रहार

अजमेर (अजमेर मुस्कान)। विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर अपना थियेटर, कलाअंकुर, आधुनिक नाट्यकला संस्थान्, आप-हम संस्था, इंडियन लेडिज क्लब, न्यू आदर्श शिक्षा समिति, द टर्निग पॉईट स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में सतगुरू इंटरनेशनल के सहयोग से चार दिवसीय नाट्य फेस्टिवल का शुभारंभ अत्यंत हर्षाेल्लास के साथ किया गया। प्रथम दिवस विहान ड्रामा वर्क द्वारा मंचित हास्य नाटक चूंडामति ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया और समाज में व्याप्त पाखंड व ढोंग पर प्रहार करते हुए करारा व्यंग्य प्रस्तुत किया।

नगर की प्रसिद्ध गणिका कपटकेली के आभूषणों की गठरी चोरी हो जाने से आरंभ होती है। उसकी पुत्री मदनसुंदरी का प्रेमी कलाकरंडक, पकड़े जाने के डर से चुराई गई गठरी एक स्वयंभू साधु ज्ञानराशि के पास छोड़ देता है। ज्ञानराशि, जो स्वयं एक पाखंडी है, अपने पूर्वजों से प्राप्त जादू-टोने की छोटी-मोटी विद्या का सहारा लेकर लोगों को भ्रमित करता है। अपने अतीत के अपराधों से बचने के लिए वह गांव-गांव घूमता रहता है नाटक की हास्यपूर्ण स्थितियाँ तब उत्पन्न होती हैं जब कपटकेली चोर को पकड़ने के लिए ज्ञानराशि के पास जाती है और उसी दौरान मदनसुंदरी भी अपने प्रेमी की चोरी छिपाने के लिए साधु की सहायता लेने पहुंचती है। घटनाक्रम तब दिलचस्प मोड़ लेता है जब ज्ञानराशि, मदनसुंदरी के सौंदर्य पर मोहित होकर उसे वश में करने के लिए एक ताबीज बनाता है, लेकिन कौण्डिन्य उस ताबीज पर मदनसुंदरी की जगह कपटकेली का नाम लिख देता है। परिणामस्वरूप, कपटकेली ज्ञानराशि पर मोहित हो जाती है, जिससे हास्य की पराकाष्ठा उत्पन्न होती है।

नाटक का चरम तब आता है जब कपटकेली, मदनसुंदरी और कलाकरंडक एक साथ ज्ञानराशि के आश्रम में उपस्थित हो जाते हैं और वह अपनी सच्चाई छिपाने के लिए लगातार हास्यपूर्ण तरकीबें अपनाने लगता है। दर्शकों ने नाटक के हर दृश्य में ठहाके लगाए और कलाकारों की शानदार अभिनय क्षमता को सराहा।

नाटक में ज्ञानराशि (हेमन्त देवलेकर), कौडिन्य (अंश जोशी), कलाकरंडक (अंकित पारोचे), मदनसुंदरी (ईशा गोस्वामी), कपटकेली (श्वेता केतकर), कुसुमिका (ग्रेसी गोस्वामी), पल्लविका (दर्शिका हलवाई), मुद्गरक (शुभम कटियार), कोकिल (रूद्राक्ष भायरे), पारावत (रवि अहिवार), अधिरथ (दीपक यादव), पारिन्द्र (अभय शर्मा) ने बाखूबी अभिनय कर दर्शको की वाहवाही ली नाटक में गायन नवीन मिश्रा, नीरव पांडे, आयुष लोखंडे, शिव मोहन यादव का था। हामोनियम पर नीरज परमार, ताल वाद्य पर तेजस्विता अनंत, अंकित परोचे, रवि अहिरवार, संगीत हेमन्त देवलेकर, नाटक की वेशभूषा, रूपसज्जा परिकल्पना श्वेता केतकर की रही। नाटक की परिकल्पना, रूपान्तरंण निर्देशन सौरभ अनंत ने किया।

नाटक के प्रारंभ में नाट्यकला के अराध्य नटराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीपप्रज्वलित कर अजमेर फेस्टिवल के बारें मंे जानकारी दी गई। इस अवसर पर शहर के रंगकर्मी, साहित्यकार व प्रबुद्धजन उपस्थित थे, जिनमें कंवल प्रकाश किशनानी, गिरधर तेजवानी, राजा डी थारानी, एस.पी.मित्तल, सुरेन्द्र चतुर्वेदी, सोमरत्न आर्य, रमेश अग्रवाल, प्रीति तोषनीवाल, रास बिहारी गौड़, अनंत भटनागर, पवित्र कोठारी, श्रीमती श्वेता आनंद, हमेन्त भाटी, अनिल जैन, प्रहलाद पारीक, सुनील दत्त जैन, डॉ. हरबस दुआ, प्रशान्त अग्रवाल, पुष्पा लोढ़ा, डॉ. लाल थदानी, नरेश अगवानी, स्नग्धा, मेघा, पद्मा, विमलेश, भामिनी, वरिष्ठ रंगकर्मी लाखन सिंह, यॉबी जॉर्ज, निरंजन कुमार, राजेन्द्र सिंह, उज्जवल मित्रा, अरविंद, रतन, अंशुल, शैलूष, मुकेश, सतीश कुमार, जुम्मा खान, विष्णु अवतार भार्गव, नरेन्द्र भारद्वाज, विकल्प सिंह, तरूण, मोहित, विकल्प सिंह, शब्बीर, तरूण कुमार, गिरराज, हरीश बेरी, गोपाल बंजारा, कृष्ण गोपाल पाराशर, मृदुल भारद्धाज, सुचिर भारद्धाज, आदि समाजसेवी व प्रबुद्धजन उपस्थित थे।  

संस्था के यॉबी जॉर्ज ने बताया प्रथम दिवस की इस सफलता ने नाट्य फेस्टिवल की आगे की प्रस्तुतियों के प्रति दर्शकों की उत्सुकता को और बढ़ा दिया है। अगले तीन दिन तक विभिन्न प्रकार की नाट्य प्रस्तुतियाँ होंगी, जो दर्शकों को नाट्य कला की समृद्धि और विविधता से अवगत कराएंगी।

शुक्रवार को मंचित नाटक

कल 28 मार्च को जोधपुर के अरू स्वाति व्यास के निर्देशन में खांचे नाटक का मंचन किया जायेगा। 

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