प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि की राशि डीबीटी द्वारा लाभार्थियों को हस्तांतरित
कृषि देश की अर्थव्यवस्था की रीड की हड्डी तो किसान इसकी आत्मा : भागीरथ चौधरी
अजमेर (अजमेर मुस्कान)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में किसान सम्मान समारोह का भव्य आयोजन सोमवार को भागलपुर, बिहार में किया गया। राज्य स्तरीय यह कार्यक्रम राज्य कृषि प्रबंध संस्थान दुर्गापुरा जयपुर में संपन्न हुआ। जिला स्तरीय कार्यक्रम कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी के मुख्य आतिथ्य में कृषि विज्ञान केंद्र तबीजी के तत्वाधान में राष्ट्रीय बीज एवं मसाला अनुसंधान केंद्र में आयोजित हुआ।
इस अवसर पर जैविक एवं प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। साथ ही, राष्ट्रीय कार्यक्रम का भागलपुर बिहार से लाइव प्रसारण किया गया। प्रधानमंत्री ने पीएम किसान सम्मान निधि की 19वीं किस्त किसानों के खातों में हस्तांतरित की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री मोदी ने वारिसलीगंज-नवादा-तिलोया रेलखंड के दोहरीकरण, इस्माइलपुर-रफीगंज रोड ओवरब्रिज, 10 हजार किसान उत्पादक संगठन, स्वदेशी नल उत्कृष्ट केंद्र एवं दुग्ध उत्पादक संगठन राष्ट्र को समर्पित किए।
इस कार्यक्रम में कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा की भारत देश कृषि प्रधान है। कृषि देश की अर्थव्यवस्था की रीड की हड्डी है। किसान इसकी आत्मा है। अन्नदाता संपन्न एवं समृद्ध होंगे तब ही देश विकसित होगा। देश को आजाद हुए 77 वर्ष से अधिक हो चुके है । इसके बाद भी किसान संघर्ष कर रहा है। कृषक की खेती करने की कोई आयु सीमा नहीं है। अन्नदाता अंतिम सांस तक अन्न उत्पादन करता है। साथ ही कोई समय सीमा भी नहीं। किसान रात दिन मेहनत करके 145 करोड़ जनता का पेट भरता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ऐसे में प्रधानमंत्री किसान सम्मन निधि की शुरुआत की गई। इसके 6 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। आज 11 करोड़ किसानों को प्रधानमंत्राी किसान सम्मान निधि के तहत 2 हजार रुपए की 19वीं किस्त डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की गई है। इससे किसान सही समय पर बीज खाद लाकर रोपण कर सकेंगे। यह निधि कृषकों के लिए वरदान साबित हुई है। समय पर आर्थिक सहायता बहुत मददगार रहती है।
उन्होंने बताया कि केंद्र एवं राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। कृषि एवं पशुधन आधारित उद्योग भविष्य में सबसे अधिक प्रचलित होंगे। भारत में अनाज की कमी से अकाल पड़े। हमारे वैज्ञानिकों ने हमें अनाज में आत्मनिर्भर बनाया। अति हर चीज की खराब होती है। उत्पादन बढ़ाने के लिए यूरिया , पेस्टीसाइड आदि का अत्यधिक उपयोग हानिकारक होता है। इससे उत्पादन घटता है एवं लागत बढ़ती है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड में निर्धारित मृदा स्वास्थ्य के अनुसार फसल ,खाद एवं बीज का चयन करना चाहिए।
उन्होंने कृषकों से उपज का प्रसंस्करण करने, अन्न के उपयोग के फायदे, जैविक एवं प्राकृतिक खेती के लाभ आदि पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि किसान विज्ञान केंद्र एवं किसान उत्पादन संगठन कृषक के सच्चे मित्रा है। इनके सहयोग से वैल्यू एडिशन कर किसान आर्थिक रूप से सुदृढ़़ हो सकते है। 2047 तक विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब देश का किसान समृद्ध होगा।
कार्यक्रम में प्राकृतिक एवं जैविक खेती के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। इसमें ग्राम चाचियावास के हनुमान सिंह, पदमपुरा के शुभेंदु माथुर, माधोपुरा के नाथू लाल कुम्हार, तबिजी के रमेश चंद्र, रणजीत जाट, जयप्रकाश एवं शंकर लाल, सरवाड़ के उत्तम चंद्र सहित अन्य को सम्मानित किया गया। किसान उत्पादन संगठन सहित जैविक खेती के प्रचार के लिए पत्राकारों को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर निदेशक जे.पी. मिश्रा, डॉ. विनय भारद्वाज, डॉ. डी.एस. भाटी, संयुक्त निदेशक संजय तनेजा, मनोज शर्मा, सचिन कापड़े , सरपंच राजेंद्र गैना सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
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